सच्चा दोस्त : शिक्षा एवं संगठन के क्षेत्र में अपने बेहद कम उम्र में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के तहसील पिपरिया से जाने माने स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्त्ता एवं शिक्षक चैन सिंह पटेल से जब सच्चा दोस्त समाचार के लिए सच्चा दोस्त प्रतिनिधि अनामिका चौरसिया ने स्कूल से कॉलेज में प्रवेश ले रहे विद्यार्थियों के सन्दर्भ में चर्चा किया तो जानिए क्या बोलते है श्री पटेल कितना जरुरी है अनुशासन जीवन में…

अनामिका – नमस्ते सर कैसे आप?
चैन सिंह जी – मै बढ़िया हूँ।

अनामिका – आप मुझे अपने बारे में कुछ बताइये सर, ऐसे तो आपका पिपरिया में काफी चर्चित नाम है पर हमारे पाठको के लिए आपका परिचय दीजिये?
चैन सिंह जी – मैं चैन सिंह पटेल, मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिला स्थित पिपरिया तहसील से हूँ, पेशे से एक शिक्षक हूँ जो अकाउंट पढ़ाता हूँ मैं शासकीय अध्यापक हुँ और साथ ही राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) में सेवा देकर करता हूँ।

अनामिका – सर जैसा की आप जानते है 12वी कक्षा का रिजल्ट आया तो स्टूडेंट बहुत ज्यादा कन्फ्यूज्ड अपने कैरियर को लेकर की किस फील्ड में जाये, वैसे ही कॉलेज स्टूडेंट भी पोस्ट ग्रैजुएशन को लेकर काफी दुविधा में रहते है उनके लिए आप क्या कहना चाहेंगे?
चैन सिंह जी – ऐसा है की स्टूडेंट को ध्यान में ये रखना चाहिए कि जो शिक्षा ग्रहण कर रहे, किस लिए कर रहे है। नोकरी के अनुसार कम मेहनत करके भी नोकर बन जाते है। शिक्षा पदृति के अनुसार राष्ट्रीय सेवा के क्षेत्र, राजनीती के क्षेत्र, समाज सेवा के क्षेत्र ऐसी कई चीजें है। यदि हम समुचिक शिक्षा व्यवस्था ध्यान में रखकर सिखने के लिए कुछ करने के लिए यदि हमको पढ़ना है, तो वो बच्चे आज भी मेहनत करते है अलग फील्ड चुनकर उसमे भी आगे बढ़ते है। तो सबसे पहले तो हमें करना क्या है इसका ध्यान रखना होगा नौकर बनना है या मालिक? तब जाकर हम सही क्षेत्र चुन पाएंगे।

अनामिका – सर आज कल के जनरेशन के विद्यार्थी पढ़ाई में बिलकुल इंटरेस्टेड नही रहते क्या कारण है?
चैन सिंह जी – अंग्रेजो के ज़माने से ऐसी शिक्षा पद्धति बनाई गयी है जो की कम मेहनत करके भी आपको एक नोकर बना देता है, यदि हम समुचित शिक्षा व्यवस्था में रहकर कुछ पाने के लिए सीखेंगे तो हमको पढ़ना है और आज भी ऐसे बच्चे है जो जीतोड़ मेहनत करते है। लेकिन आपकी जो शिक्षा का पहचान होती है, वो पद्धति हमारा राष्ट्रीय नही विदेशी है जो सिर्फ हमें नौकर बना सकता है। अंग्रोजो द्वारा इस देश को लंबे समय तक शासन किया उन्होंने अपने हिसाब से काम करने वाले लोग तैयार किये, इसलिए आपके बच्चे वो ही शिक्षा ग्रहण कर रहे है जिसमे नौकर बनने का शिक्षा ज्ञान दिया जाता हैं। उसके अलावा कुछ सोचते ही नही वो की किसी और क्षेत्र में भी जाया जा सकता है, ऐसी चीजें अपना कर वे सक्सेस हो जाते है। लेकिन ज्ञान वृद्धि नही होती हैं, यही कारन है की ये लोग पढ़ने में इंटरेस्टेड नही होते हैं।

अनामिका – सर जैसा आपने बताये की स्टूडेंट प्रॉपर वे में शिक्षित नही हो पा रहे है, ऐसे में आपके नजरिये से स्टूडेंट का फ्यूचर का क्या होगा?
चैन सिंह जी – आज कल के स्टूडेंट को ज्ञान प्राप्त नही हो पा रहा, इसलिए क्योंकि किताबो में लिखी हुई चीज जो दिखती उसे सच्च मान लेते है। अकबर थे ग्रेट वो चीज मान ली है। क्यों? ग्रेट है यह नही पता होता है महाराणा प्रताप ने देश के लिए क्या कुछ न्यौछावर कर दिया उनका क्या हुआ। घांस की रोटी खाई, लेकिन लार्ड मेकलाय में तो मिनिस्टरों ने तो तय कर अकबर को महान बता दिया। बच्चा वही पड़ता वही सोचता है, इस वजह से आज के समय में किताबी ज्ञान किताबी कीड़ा हो गया है।

अनामिका – आप अपने टीचिंग लाइफ में क्या सोचते है? सरकार को एजुकेशन सिस्टम में कौन – कौन से इम्प्रूवमेंट लाना चाहिए?
चैन सिंह जी – सबसे पहले हमारी शिक्षा व्यवस्था सुधारनी होगी, हमारी सरकार को चाहिए की राष्ट्रीय शिक्षा समिति बनाये और शिक्षा का उद्देश्य मोक्ष प्राप्त, करना कल्याण प्राप्त करना होना चाहिए न कि नोकर बनने का, वर्तमान शिक्षा प्रथा बन्द हो जायेगी व्यक्ति रोजगार में शिक्षा प्राप्त करेगा। खुद का रोजगार प्राप्त करेगा, व्यवसाय प्राप्त करेगा, मालिक बनेगा वो सच्ची शिक्षा प्राप्त होगी और निश्चित ही आने वाले दौर में महत्त्वपूर्ण होगा।

अनामिका – आज कल का जो स्कूल, कॉलेज का एटमोस्टफेयर है वो पहले के एटमोस्टफेयर में बहुत फर्क है, आज टीचर को उतनी रेस्पेक्ट नही दी जा रही जो पहले होती थी, शिक्षक को बहुत हलके रूप से लेते है। इसपर आपका क्या कहना है?
चैन सिंह जी – देखिये रिस्पेक्ट (सम्मान) करने कि बात आती तो एक बहुत अच्छा उदाहरण “महर सिंह और अरविंद” उनकी बात याद आती है, उन्होंने कहा था श्रेष्ठ जन्म से नही अपितु कर्म से आती है। दूध, दही, मठा तीनो एक ही कुल के लेकिन तीनो का मूल्य अलग – अलग होता है। ऐसी ही शिक्षक है, सारे शिक्षक को एक जैसा सम्मान नही किया जाता। मै भी शिक्षको से जुड़ा हूं मैं भी मेरे गुरूजी का सम्मान करता हूँ। बहुत विद्यार्थी मेरा सम्मन करते है। शिक्षक कर्तव्य अपना पूरी ईमानदारी से निभायेंगे, अपना चरित्र व नैतिक मूल्यों के साथ अध्यापन कार्य करेंगे तो आज भी उनका सम्मान समाज में होता है। लेकिन आज कल होता क्या कि शिक्षिक अपने नैतिक मूल्यों का पतन कर रहा है उस कारण सम्मान में कमी आती है।

अनामिका – आज विद्यार्थी को कैसे रहना चाहिए?
चैन सिंह जी – स्वान निंद्रा, वथैवच गृह त्यागी, अल्पहारी विद्यार्थी, काग, चेष्ठा, वको ध्यानम सारे जो गुण हमारे धर्म में बताए गए जिसके आधार पर जो भी विद्यार्थी रहेगा वो अपने जीबन में सफलता को प्राप्त करेगा।

अनामिका – अपनी टीचिंग लाइफ में आपको किस टाइप के स्टूडेंट देखने को मिले?
चैन सिंह जी – आज के बच्चे को सिर्फ कैरियर की चिंता “नॉट थिंग अबाउट कंट्री” देश की कोई चिंता नही है। तो वो बहुत लंबे समय तक सफल नही हो पाएंगे ज्यादा से ज्यादा मंजिल नोकर बनने कि रहेगी। उससे ज्यादा वो कुछ नही कर सकते लकिन अगर शिक्षा में कैरियर के साथ कंट्री की चिंता करेंगे तो कैरियर तो अच्छा बन ही जायेगा। कंट्री अच्छी बनी तो हमारा समाज और देश सब कुछ अच्छा बन जायेगा। हम आटोमेटिक अच्छे बन जायेंगे, हमने देखा है कि अजमेर में स्थिति कैसी है। कि हमारे धर्मो में बताया गया जिनके आधार कुछ ऐसे रहेगा तो निश्चित ही अपने जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे।

अनामिका – स्टूडेंट को एग्जाम समय डर क्यों लगता है?
चैन सिंह जी – परीक्षा के समय तो परीक्षा शब्द से ही विद्यार्थी भय भीत होता है चाहे वो किसी भी तरह की परीक्षा लेकिन हिम्मत रखना चाहिए। यदि अपने पूरी ईमानदारी के साथ उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मेहनत किया है. ईश्वर आपको वो सफलता जरूर प्राप्त होगी जैसे हमने देखा एकलव्य का उदाहरण उन्हें गुरु दो्णाचार्य ने शिक्षा नहीं दिया गुरु द्रोणाचार्य ने राजकुमारों को शिक्षा देते थे. लेकिन वो
चोरी छुपे शिक्षा सीखता उसका लक्ष्य था कि उसे सीखना है। उसके बाद ही अर्जुन से बड़ा धनु धैर्य बनता है, लक्ष्य बस हमारा निश्चित होना चाहिये कि हमको यह प्राप्त करना है।

अनामिका – आरएसएस क्या है? उसमे कैसे और किस तरह का अनुसाशन होता है, बताइये?
चैन सिंह जी – आरएसएस एक राष्ट्रीय स्वयं सेवा संघ है जिसकी नितियो मे राष्ट्र ही सर्वोपरि रहता है जो देश के लिए काम करता, देश के लिये जीता है देश के लिए मरता है। हिन्दुओ को समुचित करता है, भारत माता को शिखर पर पहुँचना उसका एक ही लक्ष्य है। जैसे विद्यार्थी का एक लक्ष्य होता सफलता प्राप्त करना ऐसे ही आरएसएस का सिर्फ एक ही लक्ष्य है। जो है भारत माता का को शिखर पर रखना, एक ही मार्ग है वो है लक्ष्य उसके लिए निरान्तर कार्य करता है जिसके माध्यम से व्यक्ति निर्माण करता है। प्रतिदिन की दैनिक शाखा लगती है जिसका काम है सिर्फ व्यक्र्ति निर्माण करना है। वो एक सामान्य व्यक्ति को कहा से कहा क्या बना देता है। जिसका आपके सामने प्रमाण है वर्तमान में संगठन से निकला एक व्यक्ति प्रधानमंत्री है।

अनामिका – आज कल सोशल मीडिया का उपयोग ज्यादा हो रहा है? 10 -12 घंटे डेली इन्टरनेट यूज़ हो रहा फेसबुक , वाट्सअप स्टूडेंट मोबाइल के बिना नही रह सकते इस पर आप क्या कहेंगे…
चैन सिंह जी – इंटरनैट का उपयोग बुराई नहीं है हाँ। स्टूडेंट को इनसे थोड़ा दूर भी रहना चाहिए ये जरूरत कि चीज भी है इस लिए इनसे दूर भी नही रहे सकते इसके लिए हमें अनुशासन की जरुरत है जिसमे हम एजुकेशन और बहुत सारी चीज जिसका टाइम टेबल होता है। मैथ्स स्टूडेंट तो उसे पता की उसे कितनी टाइम मैथ्स पढ़ना चाहिए, इतने टाइम इंग्लिस पढ़नी चाहिए, सारे आल सब्जेक्ट का निशिचित समय रहता है। उसका सदुपयोग कर सकते यदि 24 घण्टे में हम उसका यूज़ करंगे तो निश्चित रूप में कही ना कही दुरूपयोग तो होगा ही। आज के युग में मोबाइल फोबिया हो गया बिना मोबाइल चेक करें नींद नहीं आती सोते नहीं, उठते नही। जो टाइम का सही तरह से उपयोग करता है, उस माध्यम का हमारे जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। ऐसा ही हमको और हमारे समाज को बनना पड़ेगा, निश्चित समय का यूज़ करे अच्छे परिणाम होंगे।

अनामिका – स्टूडेंट आज कल नेगेटिव सोचते कुछ भी करने से पहले नेगेटिविटी आ जाती है क्या कारण है?
चैन सिंह जी – नेगेटिविटी भरतीय शिक्षा व्यवस्था में है हमारी शिक्षा व्यवस्था को हमने ऐसा बना दिया है की, कोई भी व्यक्ति में नकारात्मक भाव ही आएंगे, उसके अंदर कभी सार्थक प्रशासक बनने का सोच नही आता क्योकि उसे किताबो में यही सिखया गया। देश में इस नाम का अकबर आया इनने मारा, काटा, पिटा और हम पर राज किया। गुलामी अंग्रेजो ने लाये उन्होंने हमको काटा पीटा यह चीज हमे सिखाई गई है।
बच्चो को वीर्य सौर्यता वाली कहानी नही बताई जाती उनको अच्छे – अच्छे पाठ्क्रम शिवाजी, महाराणा प्रताव, भगतसिंह उनकी कहानी नही सिखाई जाती। ऐसे लोगो के बारे में नही बताते बस लड़ाई, पिटाई, मार पीट, उस इतिहास को पढ़ाया। जबकि हमारा गोरवशाली इतिहास वो नही बताया गया, एक दिन में ही कोई का भाव नही बनता। बचपन से यदि हम पॉजिटिव चीजे पड़ेंगे तो हर चीज पॉजिटिव होगी हमारा गौरव रहा जैसा माहौल होगा वैसे ही सिख मिलेगी और सोच होगी।

अनामिका – आप अपनी व्यस्तम जीवन में अपने परिवार को कितना टाइम देते है, कोचिंग, स्कूल, समाज सेवा कैसे मेनेज करते है?
चैन सिंह जी – हाँ। मेरी लाइफ व्यस्त बहुत है। लेकिन पूरा व्यवस्थित दिनचर्या है प्रतिदिन का समय निर्धारित है कि मुझे कहा कितना समय देना उतना समय में वहा देता हूं। कितना बच्चो को, कितना संगठन में देना है उतना देता हूँ, मैं व्यवस्थित रूप से समय देता हूं। शाखा डेली जाते है तो 5 बजे उतना होता वो समय बच जाता। आज कल उठने का टाइम टेबल गड़बड़ हो गया यदि समय पर सोयेंगे तो समय पर उठेंगे काफी लंबा समय रहता सारी चीजें बहुत आसानी से हो जाती है।

अनामिका – आरएसएस में कौनसी आयु के बच्चे प्रवेश कर सकते?
चैन सिंह जी – आरएसएस में हर उम्र के बच्चे आते, बाल विकास के तीन चार बच्चे उनकी भी टीम होती है। उन्हें बहुत कुछ सिखया जाता आरएसएस में भारत माता की प्रार्थना होती है, शाखा में खेल कूद का कार्यकम होता है। खेल- खेल में बच्चो को बहुत अच्छी चीज सिखाई जाती जो राष्ट्रीय प्रेम की होती है। गीत भी राष्ट्रीय प्रेम के गाते ओर बच्चो को उसमे रूचि बढ़ती जाती है। एक बार बच्चा प्रवेश हो गया जीवन में आरएसएस का कार्यकर्ता रहता है।